1. जज़्बा होना सबसे जरूरी है… मुझे बहुत ख़ुशी है कि आज सवा सौ करोड़ लोगों के मन में एक उमंग, आशा और संकल्प का भाव है और लोग मुझसे अपेक्षा कर रहे हैं। 2. अब अटकाने, लटकाने और भटकाने वाला काम नहीं होता, अब फाइलों को दबाने वाली संस्कृति खत्म कर दी गयी है। सरकार अपने हर मिशन, हर संकल्प को जनता के सहयोग से पूरा कर रही है। 3. भारत आँख झुकाकर या आँख उठाकर नहीं बल्कि आँख मिलाकर बात करने में विश्वास करता है। 4. मेरी पूंजी है- कठोर परिश्रम और सवा सौ लोगों का प्यार। 5. “तब और अब” में जमीन आसमान का अंतर क्योंकि जब नीति स्पष्ट हो, नीयत साफ़ हो और इरादे नेक हों तो उसी व्यवस्था के साथ आप इच्छित परिणाम ले सकते हैं। 6. जिस पर संतोष का भाव पैदा हो जाता है, जीवन फिर आगे नहीं बढ़ता। हर आयु, हर युग, कुछ न कुछ नया पाने को गति देता है। 7. “आयुष्मान भारत” की सोच सिर्फ सेवा तक सीमित नहीं है बल्कि ये जनभागीदारी का एक आव्हान भी है ताकि हम स्वस्थ, समर्थ और संतुष्ट न्यू इंडिया का निर्माण कर सकें। 8. भारत की विकास गाथा तब तक पूरी नहीं होगी जब तक कि हमारे देश के पूर्वी भाग की प्रगति पश्चिमी भाग के बराबर न हो।...